Friday, 13 December 2019

मेरी सच्ची कहानी

मेरा नाम विनीत कुमार है मैं एक छोटे परिवार से हूँ और मेरे पिताजी एक किसान हैं, मेरे पिताजी के चार बच्चे हैं तीन लड़का औऱ एक लडकी हैं।औऱ मेरे पिताजी बहुत मेहनत करते हैं और हम छोटे थे तब हमारे पापा जी हमको डाटा करते थे।
 तब हम पढ़ाई नहीं करते थे इसलिए हमको डाटा करते थे, जब हमको स्कूल मे दाखिला दिलवाने ले गए तब मेरे बढ़े भाई
ने एक बच्चे का सर फोड़ दिया इसलिए कि बो गाली देरहा था।
फिर मेरे पिताजी ने हमें पढ़ने के लिऐ tusan लगा दी ।
और हम पढ़ाई करने लगे ।
मुझे six class में कासंज जिला सुमंत कुमार महेशूरी कॉलेज में दाखिला करवाया, और मै उस कॉलेज में रोज पढ़ने जाता था और मैं अच्छे अंको से पास भी हुआ ।और मैने उस कॉलेज मैं 10th और 12th अच्छे अंको से पास किया।

और मैने अपनी आर्थिक स्थिति देखते हुए यह फैसला लिया कि मैं नोकरी करूँगा और मै नोकरी करने के लिऐ फरीदाबाद चला गया और मैं बहां पर C N C मसीन मैं काम करने लगा वहाँ पर गाड़ियों के पार्ट्स बनाया करते थे और मैने वहाँ पर चार महीने काम किया और मेरे घर से फोन आया और कहा कि तेरा admision मेडिकल कॉलेज में कर वा दिया है ।

और मैंने कहा मुझसे आपने पूछा नही की मैं किआ बनना चाहता हूँ मेरे पापाजी ने कहा कि तेरे चाचा जी की बेटी पढ रही है और मैं पापाजी से इसलिये कह रहा था कि मैं इंजीनियरिंग का कोर्स करना चाहता था ,फिर मेने बाद मैं सोच कर बताया कि अब करवाया ही दिया तो कोई बात नहीं है मैं आ जाऊंगा पढ़ने के लिए ।
और मैने कॉलेज जाना सुरु कर दिया और मेरा कोर्स दो साल का था औऱ मैने बहुत मेहनत करी ।
और मैने दो साल का डिप्लोमा हासिल कर लिया ।
और जो मेरे दोस्त जॉब करने लगे औऱ बो बड़े- बड़े हॉस्पिटल मैं लग गए और उनकी अच्छी सैलरी मिल रही है ।
और मैं इतनी मेहनत करने के बाद भी एक अच्छी जॉब नहीं मिली और मैं छोटे से हॉस्पिटल मैं जॉब कर रहा हूँ ।
इसका कारण मेरे दोस्त अमीर थे इसलिये उनको सरकारी जॉब मिल गई ।
एक बात सुनना,




" गरीब बच्चों का काम होता है मेहनत करना जो बो अच्छी तरह से मेहनत करते हैं"
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मेरी सच्ची कहानी

मेरा नाम विनीत कुमार है मैं एक छोटे परिवार से हूँ और मेरे पिताजी एक किसान हैं, मेरे पिताजी के चार बच्चे हैं तीन लड़का औऱ एक लडकी हैं।औऱ मेरे...